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9 राजस्थान के त्यौहार Rajasthan ke Tyohar

राजस्थान के त्यौहार Rajasthan ke Tyohar


भारत एक त्यौहारों (Tyoharon) का देश है । भारत में कई त्यौहार आते है । भारतीय लोग पूरे वर्षभर त्यौहार मनाते रहते है । भारत में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग त्यौहार मनाये जाते है । राजस्थान भारत का एक राज्य (प्रदेश) है । इसमें भी साल में कई त्यौहार आते है । सर्वाधिक त्यौहार हिन्दुओं के है । राजस्थान में कई हिन्दुओं के त्यौहार वाणिज्य को सामंजस्य बिठाते है । जिससे लोगों को रोजगार मिलता है । हिन्दुओं के त्यौहार हिन्दू पंचांग के अनुसार आते है । जिसमें हिन्दू महीने होते है और महीनों में त्यौहार शीतलाष्टमी, दिपावली, होली …. इत्यादि आते है । आजकल लोग गुगल पर शर्च करते है कि aaj kaun sa tyohar hai है ।

हिन्दू माह

हिन्दुओं के त्यौहार हिन्दू पंचांग के माह 12 होते है । पंचांग में चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन महीनें आते है । इन महीनों में त्यौहार शीतलाष्टमी, दिपावली, होली …. इत्यादि आते है । आइए .. इनको हिन्दू महीनों के अनुसार पढ़ते है ।

चैत्र

• चैत्र कृष्ण अष्टमी को शीतलाष्टमी आती है ।
• चैत्र कृष्ण अष्टमी से चैत्र शुक्ल तृतीया तक घुड़ला त्यौहार मारवाड़ में मनाया जाता है ।
• चैत्र कृष्ण एकम् को धुलण्डी आती हैं ।
• चैत्र कृष्ण एकम् से चैत्र शुक्ल तृतीया गणगौर का त्योहार मनाया जाता है । गणगौर सर्वाधिक गीत वाला त्यौहार है ।
• चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती आती है ।
• चैत्र शुक्ल अष्टमी को अशोकाष्टमी कहते हैं
• चैत्र शुक्ल एकम् के दिन हिंदुओं का नववर्ष प्रारंभ होता है ।
• चैत्र शुक्ल एकम् को अरुणधति व्रत मनाया जाता है । महिलाएँ अपने चरित्र उत्थान के लिए अरुणधति व्रत करती हैं ।
• चैत्र शुक्ल एकम् को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा का त्यौहार मनाया जाता है ।
• चैत्र शुक्ल एकम् को वर्ष प्रतिपदा भी कहते हैं ।
• चैत्र शुक्ल एकम् से नवमी तक बसंतीय नवरात्रि आती हैं ।
• चैत्र शुक्ल चतुर्थी को जैसलमेर में बिना ईश्वर के गणगौर निकाली जाती है । जोधपुर और बूंदी में गणगौर की सवारी नहीं निकाली जाती है ।
• चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर का मेला जयपुर में लगता है ।
• चैत्र शुक्ल तृतीया को धींगा गणगौर का मेला उदयपुर में लगता है ।
• चैत्र शुक्ल द्वितीया को सिंजारा मनाया जाता है । छोटी तीज के 1 दिन पहले और गणगौर के 1 दिन पहले सिंजारा मनाया जाता है ।
• चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी कहते हैं ।
• चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष आता है ।

वैशाख

• वैशाख पूर्णिमा को पीपल पूर्णिमा कहते हैं ।
• वैशाख शुक्ल तृतीया (आखा तीज) के दिन दिया हुआ दान सबसे उत्तम माना जाता है ।
• वैशाख शुक्ल तृतीया (आखा तीज) के दिन राजस्थान में सर्वाधिक बाल विवाह होते हैं ।
• वैशाख शुक्ल तृतीया (आखातीज) के दिन से सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ माना जाता है ।
• वैशाख शुक्ल तृतीया को आखा तीज और अक्षय तृतीया कहते हैं ।

ज्येष्ठ

• ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को निर्जला एकादशी आती है ।

आषाढ़

• आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं ।
• आषाढ़ पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा आती है ।
• आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाते हैं ।
• आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं ।
• आषाढ़ शुक्ल नवमी को भड़ल्या नवमी कहते हैं ।

श्रावण

• श्रावण अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं ।
• श्रावण कृष्ण नवमी के दिन नेवले की पूजा करते हैं ।
• श्रावण कृष्ण नवमी निडर नवमी आती है ।
• श्रावण कृष्ण पंचमी का मेला जोधपुर के मंडोर में लगता है ।
• श्रावण कृष्ण पंचमी को नाग पंचमी कहते हैं ।
• श्रावण पूर्णिमा के दिन अमरनाथ (जम्मू कश्मीर) में बर्फ का शिवलिंग बनता है ।
• श्रावण पूर्णिमा को अमरनाथ मेले की यात्रा का समापन होती है ।
• श्रावण पूर्णिमा को नारियल पूर्णिमा भी कहते हैं
• श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबंधन मनाया जाता है ।
• श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन के दिन श्रवण कुमार का चित्र बनाकर पूजा की जाती है ।
• श्रावण शुक्ल तीज (छोटी तीज) के दिन से राजस्थान में त्योहारों का आगमन शुरू होता है ।
• श्रावण शुक्ल तीज को छोटी तीज का त्यौहार मनाया जाता है ।
• श्रावण शुक्ल तीज को जयपुर में छोटी तीज का मेला भरता है ।
• श्रावण शुक्ल पंचमी को भी राजस्थान में कहीं कहीं पर नाग पंचमी के रूप में मनाते हैं ।
• श्रावण शुक्ला द्वितीया को सिंजारा मनाया जाता है ।

भाद्रपद

• भाद्रपद अमावस्या को सतियाँ अमावस्या आती हैं ।
• भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को जन्माष्टमी आती है ।
• भाद्रपद कृष्ण तृतीया को बड़ी तीज, बूढ़ी तीज, कजली तीज व सातुड़ी तीज कहते हैं ।
• भाद्रपद कृष्ण तृतीया को बूंदी जिले में बड़ी तीज (सातुड़ी तीज) का मेला लगता है ।
• भाद्रपद कृष्ण द्वादशी (बछ बारस) के दिन गेहूँ, जौ व दूध से बनी मिठाइयों का प्रयोग नहीं किया जाता है ।
• भाद्रपद कृष्ण द्वादशी को बछ बारस कहते हैं ।
• भाद्रपद कृष्ण नवमी को गोगा नवमी आती है ।
• भाद्रपद कृष्ण षष्टमी (हल षष्टि) के दिन दूध व दही का प्रयोग नहीं किया जाता है ।
• भाद्रपद कृष्ण षष्टमी को उब छठ आती है ।
• भाद्रपद कृष्ण षष्टमी को चंदन षष्टमी भी कहते हैं ।
• भाद्रपद कृष्ण षष्टमी को हलषष्टि आती है ।
• भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक श्राद्ध निकाले जाते हैं । मीणा जनजाति के लोग श्राद्ध गोवर्धन पर्व पर निकालते हैं । गुर्जर जनजाति के लोग दीपावली के दिन श्राद्ध निकालते हैं । सहरिया जाति के लोग श्राद्ध नहीं निकालते हैं ।
• भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक सांझी का त्यौहार मनाया जाता है । सांझी के त्यौहार में कुंवारी कन्या सांझी व्रत करती है ।
• भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन निंबार्क संप्रदाय का मेला सलेमाबाद (अजमेर) में लगता है ।
• भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राधा अष्टमी आती है ।
• भाद्रपद शुक्ल एकादशी को देव झूलनी एकादशी और जलझूलनी ग्यारस भी कहते हैं ।
• भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश चतुर्थी आती है ।
• भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को शिवा चतुर्थी आती हैं ।
• भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को सवाई माधोपुर के रणथम्भौर में गणेश चतुर्थी का मेला लगता है ।
• भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका तीज आती है ।
• भाद्रपद शुक्ल पंचमी (ऋषि पंचमी) के दिन माहेश्वरी समाज के लोग रक्षाबंधन का त्यौहार मनाते हैं ।
• भाद्रपद शुक्ल पंचमी को ऋषि पंचमी कहते हैं ।

आश्विन

• आश्विन पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं ।
• आश्विन शुक्ल अष्टमी को दुर्गा अष्टमी आती है ।
• आश्विन शुक्ल अष्टमी को पश्चिम बंगाल में विशेष रूप से मनाया जाता है ।
• आश्विन शुक्ल एकम् से नवमी तक शारदीय नवरात्रि आती हैं ।
• आश्विन शुक्ल दशमी (दशहरे) के दिन खेजड़ी की पूजा की जाती है और लीलटास पक्षी के दर्शन किए जाते हैं ।
• आश्विन शुक्ल दशमी को कोटा का प्रसिद्ध दशहरा का मेला का भरता है ।
• आश्विन शुक्ल दशमी को दशहरा मनाया जाता है ।

कार्तिक

• कार्तिक अमावस्या को दीपावली आती है । दीपावली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है ।
• कार्तिक अमावस्या को भगवान महावीर स्वामी और स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण (मृत्यु) दिवस है ।
• कार्तिक अमावस्या को वैश्य समाज व्यापारी लोग अपने वही खाते को बदलते हैं ।
• कार्तिक कृष्ण अष्टमी के दिन अहोई माता और उसके पुत्रों का चित्र बनाकर पूजा करते हैं ।
• कार्तिक कृष्ण अष्टमी को अहोई अष्टमी आती है ।
• कार्तिक कृष्ण एकादशी को तुलसी एकादशी कहते हैं ।
• कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को करवा चौथ आती है । करवा चौथ महिलाओं का सबसे बड़ा त्यौहार है । यह पूर्णत: पति को समर्पित त्यौहार है ।
• कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को छोटी तीज कहते हैं ।
• कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को रूप चतुर्दशी भी कहते हैं ।
• कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस कहते हैं ।
• कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी आती है । गोपाष्टमी के दिन कौवे को एक ग्रास खिला कर उसकी परिक्रमा करके कुछ दूर तक शासन में पर हर मनोकामना पूर्ण होती है ।
• कार्तिक शुक्ल एकम् को अन्नकूट पर्व या गोवर्धन पर्व कहते हैं ।
• कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) से सभी मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं ।
• कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी एकादशी, देवउठनी ग्यारस और प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं ।
• कार्तिक शुक्ल द्वितीय (दूज) को भैया दूज का त्यौहार मनाया जाता है ।
• कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम दूज भी कहते हैं ।
• कार्तिक शुक्ल नवमी को आँवला नवमी और अक्षय नवमी भी कहते हैं ।

मार्गशीर्ष

• मार्गशीर्ष माह में कोई भी त्यौहार नहीं आते व मांगलिक कार्य नहीं होते है ।

पौष

• पौष माह में लगभग सभी मन्दिरों में पौष-बड़ा प्रसादी के रूप में बाँटे जाते है ।

माघ

• माघ अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं ।
• माघ कृष्ण चतुर्थी को तिलकुटा चौथ आती है ।
• माघ कृष्ण चतुर्थी को संकट चौथ भी कहते हैं ।
• माघ शुक्ल पंचमी के दिन से फाग उड़ाना प्रारंभ होता है । बसंत पंचमी के दिन शेखावाटी क्षेत्र में ढ़प नृत्य करते हैं । बसंत पंचमी के दिन सरस्वती कामदेव और रति पाल की पूजा की जाती है ।
• माघ शुक्ल पंचमी को बसंत पंचमी कहते हैं ।

फाल्गुन

• फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को महाशिवरात्रि आती है ।
• फाल्गुन पूर्णिमा को अंगारों की होली अजमेर के 10 कड़ी में खेली जाती है ।
• फाल्गुन पूर्णिमा को कूड़ा मार होली अजमेर के भिनाय में खेली जाती है ।
• फाल्गुन पूर्णिमा को गोबर के काण्डों की होली गलियाकोट डूँगरपुर में खेली जाती है ।
• फाल्गुन पूर्णिमा को देवर भाभी होली अजमेर के ब्यावर में खेली जाती है ।
• फाल्गुन पूर्णिमा को पत्थर मार होली बाड़मेर में खेली जाती है ।
• फाल्गुन पूर्णिमा को लठमार होली करौली के महावीर में खेली जाती है ।
• फाल्गुन पूर्णिमा को होली का त्यौहार मनाया जाता है ।
• फाल्गुन शुक्ल एकादशी को ढूंढ मनाया जाता है ।
• फाल्गुन शुक्ल द्वितीय को फुलेरा दूज कहते हैं ।

आप राजस्थान के राजकीय कैलेंडर को देख सकते हो ।

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