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1857 की क्रान्ति । 1857 ki kranti in hindi

भारत में 1857 की क्रान्ति हुई । तब राजस्थान में भी 1857 की क्रान्ति राजस्थान (1857 ki kranti rajasthan) अर्थात् राजस्थान में भी 1857 की क्रान्ति हुई । उस 1857 की क्रान्ति के कारण (1857 ki kranti ke karan) का आज हम 1857 की क्रान्ति के महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं कारण (1857 ki kranti ke Notes) को जानेगें ।

14 राजस्थान के लोकगीत

राजस्थान के लोकगीत (Rajasthan Ke Lokgit) :- भारत एक त्यौहारों का देश है । इन त्यौहारों पर लोग खुशी मनाने के लिए त्यौहारों के गीत गाते है । जिस तरह राजस्थान में त्यौहार समय अर्थात् मौसम के अनुसार आते है । उसी प्रकार राजस्थान के गीत (Rajasthan ke Git) भी अनेक तरह के होते है और मौसम के अनुसार भी होते है । गीत दुःख, सुख, यश और भक्ति को व्यक्त करते है । देवेन्द्र सत्यार्थी ने लोकगीतों को किसी संस्कृति का मुंह बोला चित्र कहा है । लोकगीतों के संस्मरण को चोबोली कहते है ।

13 Rajasthan ki Prachin Sabhyata

Rajasthan ki Prachin Sabhyata (राजस्थान की प्रमुख सभ्यताएँ) :- कल हमने अध्ययन किया था Rajasthan Ki Devi (राजस्थान की लोक देवियों) के बारे में और आज का अध्याय है Rajasthan ki Prachin Sabhyata (राजस्थान की प्रमुख सभ्यताएँ) ।

12 Rajasthan Ki Devi

राजस्थान की लोक देवीयाँ (Rajasthan Ki Devi) rajasthan ki devi (राजस्थान की प्रमुख लोक देेवियाँ) :- मनुष्य की प्रवृत्ति रही है कि किसी न किसी देवी और देवताओं की पूजा अर्चना करने की । वैसे भी भारतीय समाज में नारियों को देवी समझकर उनकी बातों को आशिर्वाद समझकर मना जाता है ।और उनकी पूजा की …

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11 चौहानों का इतिहास History of Chauhan

चौहानों का इतिहास (History of Chauhan) 7 वीं से 12 वीं शताब्दी तक का काल ‘चौहानों का काल’ कहलाता है । चौहानों की उत्पत्ति के मत • अग्नि कुण्ड का मत शाकम्बरी के चौहान चौहान वंश की स्थापना • चौहान वंश की स्थापना 551 ई॰ में वासुदेव चौहान ने की ।• वासुदेव चौहान को ‘चौहानों …

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राजस्थान-के-लोक-नृत्य-Rajasthan-ke-Lok-Nritya-Dance

10 राजस्थान के लोक नृत्य Rajasthan ke Lok Nritya

राजस्थान के लोक नृत्य (Rajasthan ke Lok Nritya) :- पिछले अध्याय में राजस्थान के त्यौहार Rajasthan ke Tyohar के बारे में जानकारी प्राप्त की थी । आज हम नृत्य (dance) के बार में जानकारी लेंगे । भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक लोकनृत्य प्रचलित हैं। लोगों को नाचना, गाना, बजाना और देखना अच्छा लगता है । राजस्थानी लोगों को भी यह अच्छा लगता है । किसी किसी जाति का तो यह पैशा है । नृत्य त्यौहार एवं खुशी के अवसर पर ही नृत्य किया जाता है । इस प्रकार राजस्थान में किसी स्थान पर प्रमुख रूप से प्रसिद्ध हुए नृत्य को लोक नृत्य कहा गया है ।

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8 राजस्थान के लोक देवता Rajasthan ke lokdevta

लोगों में भक्ति का प्रचलन प्राचीनकाल से चला आ रहा है । इस लिए लोग किसी न किसी को देवी देवता के रूप में पूजते है । इसी प्रकार राजस्थान में भी राजस्थान के लोग अपने देवता एवं देवियों को भी पूजते है । राजस्थान के लोक देवता और देवियाँ (राजस्थान के प्रमुख लोक देवता एवं देवी) कई है । देवताओं में राजस्थान में 5 पंचपीर (राजस्थान के पंचपीर) है । गोगाजी, पाबूजी, मेहाजी, रामदेवजी और हड़बूजी ।

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6 Rajasthan Sambhag राजस्थान के संभाग

राजस्थान के संभाग (Divisions of Rajasthan/ Rajasthan Ke Sambhag) वर्तमान राजस्थान में 33 जिले है । वर्तमान राजस्थान में 7 संभाग है । राजस्थान में संभागीय व्यवस्था का प्रारम्भ 1949 को तत्कालीन मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री ने किया था । राजस्थान में प्रारम्भ में 5 संभाग थे – जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर और कोटा । 1962 …

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